शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

क्‍योंं करें बीमा और निवेश की जल्‍द शुरुआत?

क्‍योंं करें बीमा और निवेश की जल्‍द शुरुआत?

मनीश कुमार मिश्र

हात्मा गांधी ने कहा था, "हम वर्तमान में जो करते हैं उस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है"। उनका यह कथन निवेश के मामले में भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आप आज अपनी आमदनी से उचित तरीके से निवेश और बचत करते हैं तो इससे आपको भविष्य में एक बेहतर जिंदगी जीने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे आप उन अतिरिक्त लागतों से भी बचेंगे जो इसमें विलंब के कारण आपको झेलना पड़ सकता है।

यह एक वास्तविकता है कि व्यक्ति की बचत एवं उसके निवेश, उसके वित्तीय स्वास्थ्य का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इस वजह से वित्तीय योजनाकार सलाह देते हैं कि जैसे ही लोगों की वित्तीय स्थिति ऐसी हो कि वे बचत/निवेश कर सकते हों, उन्हें तत्काल इसकी शुरुआत कर देनी चाहिए। दुर्भाग्य से, नई शहरी जीवनशैली ने लोगों को बचत व निवेश करने की बजाए खर्च करने की ओर ज्यादा प्रेरित किया है। इंडिया इंक के समृद्ध होने और युवा पेशेवरों को भारी-भरकम पैकेज मिलने के साथ-साथ, लोग पहले से कहीं छोटी आयु में ही वित्तीय रूप से स्वतंंत्र बन गए हैं। वे अपने करियर की बिल्कुल शुरुआत से ही शहरी जीवनशैली कायम रखने के लिए खर्चे भी अधिक कर रहे हैं। नतीजतन, लंबी अवधि में उनमें से अधिकतर अपनी आमदनी को लेकर संतुष्ट हो जाते हैं।
हालांकि, वे अपनी वित्तीय जरूरतों और आकांक्षाओं के बारे में तो जानते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो नियमित रूप से अपने वित्तीय स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण दीर्घकालिक लक्ष्यों जैसे सेवानिवृत्ति और बच्चे की शिक्षा के लिए बचत  की अपनी क्षमता की जांच करते हैं। वे यह नहीं समझ पाते हैं कि एक उचित वित्तीय योजना को सूत्रबद्ध करने और उसे क्रियान्वित करने में जो विलंब वे कर रहे हैं, भावी वित्तीय लक्ष्यों पर उसका गंभीर प्रभाव हो सकता है। योजना बनाने में की गई टालमटोल का परिणाम जीवन के बाद के चरणों में वित्तीय बोझ के रूप में देखने को मिल सकता है और हो सकता है कि तब आप भावी वित्तीय लक्ष्यों के लिए बचत को अधिकतम कर पाने में असमर्थ रहें।

शिक्षा के खर्च पर महंगाई का असर

आइए एक उदाहरण की सहायता से हम उस लागत को समझते हैं जो इस विलंब की वज‍ह से हमें झेलनी पड़ सकती है। वर्तमान महंगाई दरों को ध्यान में रखते हुए, एक आकलन से हमें यह पता चलता है कि जिस एमबीए का खर्चा आज 4,00,000 रुपये है, 15 वर्षों में उसका खर्चा 20,00,000 रुपये पर पहुंच जाएगा। कितने माता-पिता ऐसे होंगे जो जरूरत पड़ने पर अपने बच्चे के लिए इस खर्चे को सेवानिवृत्ति कोष में से धन लिए बिना वहन कर पाने के लिए वित्तीय रूप से तैयार होंगे?

चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी की भूमिका

पारंंपरिक विधियों, जैसे कि बैंक के बचत खाते के अलावा माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य सुरक्षित करने के लिए म्‍यूचुअल फंड भी चुन सकते हैं। दूसरी तरफ, चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी में निवेश यह सुनिश्चित करता है कि माता-पिता के न होने की स्थिति में भी बच्चे की शिक्षा में कोई बाधा न आए। यह न केवल शिक्षा की बढ़ती हुई लागत को ध्यान में रखते हुए एक कोष का सृजन करता है बल्कि माता-पिता को जीवन बीमा भी प्रदान करता है।

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पेंशन प्लान

भारत में औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अभाव के कारण 45 प्रतिशत लोगों के लिए सेवानिवृत्ति, चिंता का एक दूसरा महत्वपूर्ण विषय है। लोग सेवानिवृत्ति के बाद अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए प्रोविडेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा निर्भर करते हैं। लेकिन महंगाई की वर्तमान दर, अचल संपत्तियों की कीमतों में हो रहे उछाल और भारत में जीवन-यापन की लागत में हो रही वृद्धि को देखते हुए, मात्र ये बचत पर्याप्त नहीं होगी। सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय प्रवाह के अभाव में आरामदेह जीवनशैली के लिए आपको अभी से योजना बनाने की जरूरत है।

रिटायरमेंट के विभिन्न विकल्प

आज सेवानिवृत्ति कोष बनाने के लिए लोगों के पास कई विकल्प मौजूद हैं जैसे म्यूचुअल फंडों की पेंशन एवं रिटायरमेंट योजनाएं। पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ मिलकर ये प्लान सेवानिवृत्ति लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को एक संतुलित फाइनेंशियल पोर्टफोलियो उपलब्ध करा सकते हैं।

अब आगे बिना कोई देरी किए अपनी भावी वित्तीय जरूरतों के लिए योजना बनाना शुरु कर दें ताकि आप खुद के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें। याद रखें, भविष्य के लिए सफल प्लानिंग की कुंजी है जल्द शुरुआत करना, वहीं अगर सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते।

2 टिप्‍पणियां:

Soonjara.com ने कहा…

मनीष जी आपके ब्लॉग से मुझे बहुत जानकारियां मिलती हैं। मुझे 5 साल के लिए बचत बताये।

Manish Kumar Mishra ने कहा…

शुक्रिया धीरज जी! मैं जल्द ही 5 साल के निवेश के बेहतरीन विकल्प बताऊंगा।
सप्रेम,
मनीष