गुरुवार, 15 सितंबर 2016

49 लाख के रिटायरमेंट फंड के लिए कितनेे पैसे बचाएंं

मनीश कुमार मिश्र

अपने भविष्य को वित्तीय रूप से सुरक्षित रखने के लिए आपका फाइनेंस का पंडित बनने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ अपनी बचत की निरंतरता बनाए रखनी है और बाकी का काम चक्रवृद्धि समय के साथ करता रहेगा। चक्रवृद्धि का प्रभाव दीर्घावधि में देखते ही बनता है और यह लंबी अवधि में आपको धनवान बनाने में भरपूर मदद करता है। आइए, उदाहरण के जरिए समझते हैं कि किस उम्र में कितना निवेश करने पर आपको रिटायरमेंट पर 49 लाख मिलेंगे। 49 लाख की रकम उदाहरण के लिए ली गई है, आपकी या हमारी जरूरत इससे भिन्‍न भी हो सकती है।

कैसे काम करता है चक्रवृद्धि?

मान लीजिए आप 100 रुपये कहीं जमा करते हैं और उस पर सालाना 10 प्रतिशत का ब्याज मिलता है। एक साल बाद आपके पास 110 रुपये होंगे। अगले वर्ष चक्रवृद्धि के कारण आपको 110 रुपये पर 10 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा और आपके पैसे बढ़ कर 121 रुपये हो जाएंगे। फिर अगले वर्ष 121 रुपये पर 10 प्रतिशत ब्याज प्राप्त होगा और यह सिलसिला साल दर साल चलता रहेगा। समय के साथ आपके पैसों में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।



कब होंगे पैसे दोगुने

आपकी बचत के पैसे दोगुने कब होंगे इसकी गणना का एक आम नियम काफी प्रचलित है। रूल 72 है इसका नाम। फाइनेंस में इसका खूब इस्तेमाल होता है। रूल 72 के जरिए आप यह जान सकते हैं कि आपके निवेश के पैसे कितने समय में दोगुने हो जाएंगे। आइए इसका फॉर्मूला जानते हैं।

अगर आप 100 रुपये का निवेश करते हैं जिस पर सालाना 10 प्रतिशत का चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है तो रूल 72 के अनुसार इस निवेश को दोगुना होने में 72/10=7.2 साल लगेंगे। अगर आप इससे बड़ी राशि, मान लीजिए एक लाख रुपये, का निवेश करते हैं तो लगभग सात साल में वह दो लाख रुपया हो जाएगा। इसके लिए निवेश की निरंतरता और वर्तमान फंड में बढ़ोतरी करना न भूलें, यह आपको कहीं अधिक लाभ देगा।

पुरानी शराब जैसी है चक्रवृद्धि

चक्रवृद्धि ब्याज शराब की तरह है। कहते हैं कि वाइन यानी शराब जितनी पुरानी होती है उतनी ही बेहतर होती है। इसी तरह, पैसों का निवेश भी अगर लंबी अवधि के लिए किया जाए तो इसके परिणाम काफी बेहतर होते हैं। इसलिए, अगर आप अपनी रिटायरमेंट के लिए करोड़ों रुपये की बचत करना चाहते हैं तो शुरुआत जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी किजीए। अपने पहले वेतन से या फिर 25 साल की उम्र से आप इसकी शुरुआत करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। जब आप 60 साल की उम्र में रिटायर होंगे तो आपके पास पैसों की कमी नहीं होगी और आप शानदार जीवनशैली बरकरार रख सकते हैं।

अभी निवेश करने पर कितना मिलेगा

अगर आप 25 साल की उम्र से 5,000 रुपये का निवेश शुरू करते हैं और इस पर सालाना 10 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है तो 60 साल की उम्र में आपके पास एक करोड़ रुपये से अधिक का फंड होगा। हालांकि, अगर आप इसकी शुरुआत 40 साल की उम्र में करते हैं तो इतने पैसों के निवेश से आप रिटायरमेंट के समय लगभग 33 लाख रुपये प्राप्त कर पाएंगे। यह फर्क काफी अधिक है। 40 साल के व्यक्ति को एक करोड़ रुपये के लिए कितनी बार 5,000-5,000 रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे।
टेबल के जरिए इसे समझते हैं कि विभिन्न आयु में निवेश की शुरुआत के क्या नफा-नुकसान हैं। हम मान लेते हैं कि व्यक्ति प्रत्येक वर्ष 10,000 रुपये का निवेश करता है और उसे निवेश पर 10 प्रतिशक का ब्याज मिलता है। आप इस टेबल से समझ सकते हैं कि जल्द शुरुआत के क्या फायदे हैं।


जल्दी निवेश शुरू करने के लाभ

निवेश के शुरुआत की उम्र       रिटायरमेंट फंड
20                          49  लाख रुपये
25                          30  लाख रुपये
30                          18  लाख रुपये
35                          11 लाख रुपये
40                           6 लाख रुपये

10,000 रुपये सालाना का निवेश 10 प्रतिशत की ब्याज दर के हिसाब से।

इस टेबल से आप समझ गए होंगे कि पांच साल का फर्क भी निवेश से प्राप्त होने वाले पैसों में भारी फर्क पैदा करता है। हो सकता है कि आप अधिक उम्र में निवेश की शुरुआत करें और 49 लाख रुपये के रिटायरमेंट फंड के लक्ष्य को प्राप्त करें जो 20 साल वाले व्यक्ति ने आसानी से प्राप्त किया था। आपको इसी लक्ष्य के लिए ज्यादा रकम का निवेश करना होगा ताकि आप बीते समय की भरपाई कर पाएं। इससे आपका बजट प्रभावित हो सकता है क्योंकि इस लक्ष्य के लिए आपको ज्यादा पैसे आवंटित करने होंगे। इसे समझने के लिए, दूसरा  टेबल भी देखते हैं कि किस उम्र में व्यक्ति को कितने पैसों का निवेश करना होगा ताकि वह 49 लाख रुपये के लक्ष्य को पा सके।


49 लाख के लक्ष्य के लिए सालाना निवेश की राशि

निवेश के शुरुआत की उम्र           निवेशित फंड में फर्क
20                              10,000
25                              16,600
30                              27,000
35                              45,000
40                              78,000




रविवार, 14 अगस्त 2016


हेल्‍थ इंश्‍योरेंस खरीदने से पहले जान लें से बातें, बाद में नहीं होगा पछताना

मनीश कुमार मिश्र

स्‍वास्‍थ्‍य बीमा यानी हेल्‍थ इंश्‍योरेंस के महत्‍व को मौजूदा समय में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हॉस्पिटल और दवाइयों के लगातार बढ़ते खर्च विपरीत परिस्थितियों में न केवल आपकी जेब खाली कर सकते हैं बल्कि कर्ज के बोझ तले भी दबा सकते हैं। ईश्‍वर न करे  कभी किसी को अस्‍पताल का मुंह देखना पड़े लेकिन बदलती जीवनशैली, पर्यावरण, दूषित खाद्य पदार्थ और नौकरी के तनाव के कारण होने  वाली व्‍याधियों या कीटाणु जनित बीमारियों या दुर्घटना के कारण अस्‍पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। हेल्‍थ इंश्‍योरेंस का सालाना छोटा सा प्रीमियम भर कर आप इन बड़े खर्चों से चिंतामुक्‍त हो सकते हैं। हां, हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत आपकी आयकर बचत में भी मदद करता है।

(अगले लेख में जानिए क्‍यों नहीं रहना चाहिए नियोक्‍ता के हेल्‍थ इंश्‍योरेंस के भरोसे, अगर आप किसी खास विषय पर कुछ जानना चाहते हैंं तो बताएं, हम करेंगे आपकी मदद)

हेल्‍थ इंश्‍योरेंस लेते समय आपको कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए:


  • पॉलिसी खरीदने की सही उम्र
  • उपयुक्त चिकित्सकीय परीक्षण, जो ग्राहकों को पॉलिसी खरीदने से पहले कराने होते हैं
  • पॉलिसी सेअधिकतम लाभ प्राप्‍त करने के तरीके
  • उपयुक्त राइडर्स या एड-ऑन, जो पॉलिसी के साथ ही लिए जाते हैं
  • बीमारियां, जिन्हें पॉलिसी कवर करती है
  • पहले से मौजूद बीमारियों की प्रतीक्षा अवधि
  • पुरानी बीमारियों का पारिवारिक इतिहास, जब ग्राहक को स्मार्ट हेल्थ क्रिटिकल इलनेेस कवर खरीदने का सुझाव दिया गया हो। नीचे जारी...



स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने के मामले में सबसे उपयुक्त नियम है -जितनी जल्दी, उतना ही बेहतर। अपेक्षाकृत कम उम्र में ही खुद को और अपने परिवार को बीमित कराने से पॉलिसी धारक को किफायती दामों पर पॉलिसी उपलब्ध हो जाती है। साथ ही पर्याप्‍ बीमा कवर लेकर समय पर प्रीमियम देकर पॉलिसी रिन्यू कराने पर क्लेम लेने में भी काफी सुविधा होती है। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने के लिए ज्यादातर कंपनियों ने न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा तय कर रखी है और बीमा पॉलिसी लेने से पहले इसे जांचना जरूरी है। ज्‍यदातार कंपनियां, एक निश्चित आयु (प्राय:40 से 45 वर्ष की आयु) होने पर अनिवार्य मेडिकल टेस्ट कराने पर जोर देती हैं और इसलिए इस आयु से पहले ही बीमा सुरक्षा प्राप्‍त कर लेना ठीक रहता है। यह भी उचित है कि आपका बीमा सलाहकार, आप जो बीमा पॉलिसी लेने के इच्छुक है उसकी मुख्य विशेषताओं और फायदों के बारे में आपको पूरी जानकारी दे, और आपकी जरूरतों के अनुरूप सबसे उपयुक्त पॉलिसी तय करने में आपकी मदद करे। इसके बावजूद विभिन्न बीमा पॉलिसियों के बीच तुलना करना जरूरी है। इसके लिए आप www.insurancepandit.com या www.policybazaar.com का सहारा ले सकते हैं।

एक्‍सक्‍लूजंश को समझें

सभी की तरह हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसियों में कुछ एक्सक्लूजंंश होते हैं और यह समझना भी बहुत महत्वपूर्ण है कि पॉलिसी में क्या कवर किया जाएगा और क्‍या नहीं। पॉलिसी के अंतर्गत एक्सक्लूजंस को समझने से आपके सामने यह स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि आप किस चीज के लिए क्लेम कर सकते हैं और किसके लिए नहीं। ज्‍यादातर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसियां या तो नि:शुल्‍क या मामूली अतिरिक्त लागतों पर एड-ऑन फायदे उपलब्ध कराती हैं। इन लाभों के बारे में जानकारी लेना ठीक रहता है क्योंकि इनमें कुछ ऐसे खर्च कवर किए जाते हैं जो अन्य रूप में कवर नहीं किए गए होते। कुछ प्रमुख एड-ऑन लाभों में निम्रलिखित शामिल हैं-

  • अस्पताल नकदी भत्ता (हॉस्पिटल कैश बेनीफिट)
  • घर में उपचार
  • बच्चों के साथ सहायक रूप में अभिभावकों का ठहराव व्यय
  • एम्बुलेंस शुल्क
  • इन-पेशेंट फिजियोथेरेपी शुल्क
  • सहायक व्यक्ति के खर्च
  • बच्चों का एजुकेशन फंड


सिर्फ हेल्‍थ इंश्‍योरेंस ही नहीं, इन पर भी करें विचार
बेहतर होगा कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान होने वाले खर्च को कवर करने वाली मूल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी लेने के अलावा, आपको बाजार में उपलब्ध अन्य पॉलिसियों पर भी निगाह डालें जो संपूर्ण मेडिकल कवरेज प्रदान करती हैं। ऐसे ही कुछ प्रोडक्‍ट हैं-


  • क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी 
  • हॉस्पिटल कैश पॉलिसी
  • हाई डिडक्टेबल  पॉलिसी


कैसे काम करती है हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के लिए आपको उस कंपनी की सालाना फीस देनी होती है जिसे प्रीमियम कहते हैं। आप जिस रकम का कवरेज चाहते हैं आप उसे चुनें आपको उसके हिसाब से कम या अधिक प्रीमियम देना होगा। अगर आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का सम एश्योर्ड यानी कवरेज 5 लाख रुपये चुनते हैं तो किसी बीमारी या दुर्घटना में घायल होने पर उसके इलाज के लिए बीमा कंपनी आपको 5 लाख रुपये तक की रकम की भरपाई करेगी। इसे एक बार में साल भर में मल्टीपल क्लेम में लिया जा सकता है।

बीमा कंपनी से रकम का क्लेम दो तरह से किया जा सकता है:

भरपाई: पहले आपको बिल भरने होंगे फिर आपको उस रकम का क्लेम करना होगा, बीमा कंपनी के पास और बीमा कंपनी आपको रकम का भुगतान करेगी।
कैशलेस सेटलमेंट: इसमें बीमा कंपनी के पैनल में शामिल अस्पताल पॉलिसीधारक का पूरा उपचार करता है और उसे बीमा कंपनी सीधे भुगतान करती है।

किन खर्चोंं को हेल्‍थ इंश्‍योरेंस करता है ?

विभिन्न बीमा कंपनियों के हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर अलग-अलग प्रावधान होते हैं। आम तौर पर निम्नलिखित तरह के प्रावधान होते हैं जो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के समय उसके इन्क्लूजन पर आधारित होते हैंघ्
इन-पेशेंट ट्रीटमेंट: इसमें पॉलिसी सम एश्योर्ड तक की राशि का बीमारी की वजह से हॉस्पिटलाइज कवर होता है।
प्री-हॉस्पिटलाइजेशन: इसमें हॉस्पिटलाइजेशन के तुरंत पहले के 60 दिनों में हुए मेडिकल खर्चों को कवर किया जाता है।
पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन: इसके तहत हॉस्पिटलाइजेशन के तुरंत बाद वाले  60 दिनों में हुए मेडिकल खर्चों को कवर करने का प्रावधान है।
डे-केयर प्रोसीजर्स: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के इस प्रावधान के तहत लगभग 141 सूचीबद्ध डे-केयर के ऐसे खर्चो को कवर किया जाता है जिसमें तकनीकी एडवांसमेंट की वजह से 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती।
डोमिसिलियरी ट्रीटमेंट: इसमें घर पर किसी फिजीशियन की सलाह से लिए लिए गए इलाज के खर्चको कवर करने का प्रावधान है।
इमरजेंसी एंबुलेंस: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के इस प्रावधान में 2,000 रुपये तक की अधिकतम रक म इमरजेंसी में एंबुलेंस पर खर्च करने में दी जाती है।
आयुर्वेदिक/होम्योपैथिक: वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों के बढ़ते चलन से अब तो कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक के जरिए इलाज का प्रावधान भी है।

कौन सी पॉलिसी खरीदें?

आप हेल्थ इंश्योरेंस अपने खुद या परिवार के लिए फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ले सकते हैं। आम तौर पर ऐसी पॉलिसियां 3 माह की उम्र से लेकर 65 साल वालों के लिए उपलब्ध रहती हैं। हालांकि, परिवार के प्रत्‍येक सदस्‍य के लिए अलग से हेल्‍थ इंश्‍योरेंस लेना ज्‍यादा बेहतर रहेगा।

(अपनी पसंद के विषय या प्रोडक्‍ट के बारे में जानकारी के लिए नि:संकोच बताएं, हम आपकी मदद करेंगे)

शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

क्‍योंं करें बीमा और निवेश की जल्‍द शुरुआत?

क्‍योंं करें बीमा और निवेश की जल्‍द शुरुआत?

मनीश कुमार मिश्र

हात्मा गांधी ने कहा था, "हम वर्तमान में जो करते हैं उस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है"। उनका यह कथन निवेश के मामले में भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आप आज अपनी आमदनी से उचित तरीके से निवेश और बचत करते हैं तो इससे आपको भविष्य में एक बेहतर जिंदगी जीने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे आप उन अतिरिक्त लागतों से भी बचेंगे जो इसमें विलंब के कारण आपको झेलना पड़ सकता है।

यह एक वास्तविकता है कि व्यक्ति की बचत एवं उसके निवेश, उसके वित्तीय स्वास्थ्य का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इस वजह से वित्तीय योजनाकार सलाह देते हैं कि जैसे ही लोगों की वित्तीय स्थिति ऐसी हो कि वे बचत/निवेश कर सकते हों, उन्हें तत्काल इसकी शुरुआत कर देनी चाहिए। दुर्भाग्य से, नई शहरी जीवनशैली ने लोगों को बचत व निवेश करने की बजाए खर्च करने की ओर ज्यादा प्रेरित किया है। इंडिया इंक के समृद्ध होने और युवा पेशेवरों को भारी-भरकम पैकेज मिलने के साथ-साथ, लोग पहले से कहीं छोटी आयु में ही वित्तीय रूप से स्वतंंत्र बन गए हैं। वे अपने करियर की बिल्कुल शुरुआत से ही शहरी जीवनशैली कायम रखने के लिए खर्चे भी अधिक कर रहे हैं। नतीजतन, लंबी अवधि में उनमें से अधिकतर अपनी आमदनी को लेकर संतुष्ट हो जाते हैं।
हालांकि, वे अपनी वित्तीय जरूरतों और आकांक्षाओं के बारे में तो जानते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो नियमित रूप से अपने वित्तीय स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण दीर्घकालिक लक्ष्यों जैसे सेवानिवृत्ति और बच्चे की शिक्षा के लिए बचत  की अपनी क्षमता की जांच करते हैं। वे यह नहीं समझ पाते हैं कि एक उचित वित्तीय योजना को सूत्रबद्ध करने और उसे क्रियान्वित करने में जो विलंब वे कर रहे हैं, भावी वित्तीय लक्ष्यों पर उसका गंभीर प्रभाव हो सकता है। योजना बनाने में की गई टालमटोल का परिणाम जीवन के बाद के चरणों में वित्तीय बोझ के रूप में देखने को मिल सकता है और हो सकता है कि तब आप भावी वित्तीय लक्ष्यों के लिए बचत को अधिकतम कर पाने में असमर्थ रहें।

शिक्षा के खर्च पर महंगाई का असर

आइए एक उदाहरण की सहायता से हम उस लागत को समझते हैं जो इस विलंब की वज‍ह से हमें झेलनी पड़ सकती है। वर्तमान महंगाई दरों को ध्यान में रखते हुए, एक आकलन से हमें यह पता चलता है कि जिस एमबीए का खर्चा आज 4,00,000 रुपये है, 15 वर्षों में उसका खर्चा 20,00,000 रुपये पर पहुंच जाएगा। कितने माता-पिता ऐसे होंगे जो जरूरत पड़ने पर अपने बच्चे के लिए इस खर्चे को सेवानिवृत्ति कोष में से धन लिए बिना वहन कर पाने के लिए वित्तीय रूप से तैयार होंगे?

चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी की भूमिका

पारंंपरिक विधियों, जैसे कि बैंक के बचत खाते के अलावा माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य सुरक्षित करने के लिए म्‍यूचुअल फंड भी चुन सकते हैं। दूसरी तरफ, चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी में निवेश यह सुनिश्चित करता है कि माता-पिता के न होने की स्थिति में भी बच्चे की शिक्षा में कोई बाधा न आए। यह न केवल शिक्षा की बढ़ती हुई लागत को ध्यान में रखते हुए एक कोष का सृजन करता है बल्कि माता-पिता को जीवन बीमा भी प्रदान करता है।

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पेंशन प्लान

भारत में औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अभाव के कारण 45 प्रतिशत लोगों के लिए सेवानिवृत्ति, चिंता का एक दूसरा महत्वपूर्ण विषय है। लोग सेवानिवृत्ति के बाद अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए प्रोविडेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा निर्भर करते हैं। लेकिन महंगाई की वर्तमान दर, अचल संपत्तियों की कीमतों में हो रहे उछाल और भारत में जीवन-यापन की लागत में हो रही वृद्धि को देखते हुए, मात्र ये बचत पर्याप्त नहीं होगी। सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय प्रवाह के अभाव में आरामदेह जीवनशैली के लिए आपको अभी से योजना बनाने की जरूरत है।

रिटायरमेंट के विभिन्न विकल्प

आज सेवानिवृत्ति कोष बनाने के लिए लोगों के पास कई विकल्प मौजूद हैं जैसे म्यूचुअल फंडों की पेंशन एवं रिटायरमेंट योजनाएं। पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ मिलकर ये प्लान सेवानिवृत्ति लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को एक संतुलित फाइनेंशियल पोर्टफोलियो उपलब्ध करा सकते हैं।

अब आगे बिना कोई देरी किए अपनी भावी वित्तीय जरूरतों के लिए योजना बनाना शुरु कर दें ताकि आप खुद के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें। याद रखें, भविष्य के लिए सफल प्लानिंग की कुंजी है जल्द शुरुआत करना, वहीं अगर सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते।