सबसे बड़ा रुपइया
पैसा.. पैसा.. पैसा... किसे इसकी जरूरत नहीं होती। संकट के समय भी यही सबसे बड़ा साथी होता। तो भाइयों आज से लग जाइये पैसे बनाने में...
गुरुवार, 15 सितंबर 2016
रविवार, 14 अगस्त 2016
मनीश कुमार मिश्र
स्वास्थ्य बीमा यानी हेल्थ इंश्योरेंस के महत्व को मौजूदा समय में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हॉस्पिटल और दवाइयों के लगातार बढ़ते खर्च विपरीत परिस्थितियों में न केवल आपकी जेब खाली कर सकते हैं बल्कि कर्ज के बोझ तले भी दबा सकते हैं। ईश्वर न करे कभी किसी को अस्पताल का मुंह देखना पड़े लेकिन बदलती जीवनशैली, पर्यावरण, दूषित खाद्य पदार्थ और नौकरी के तनाव के कारण होने वाली व्याधियों या कीटाणु जनित बीमारियों या दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। हेल्थ इंश्योरेंस का सालाना छोटा सा प्रीमियम भर कर आप इन बड़े खर्चों से चिंतामुक्त हो सकते हैं। हां, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी आयकर अधिनियम की धारा 80डी के तहत आपकी आयकर बचत में भी मदद करता है।
(अगले लेख में जानिए क्यों नहीं रहना चाहिए नियोक्ता के हेल्थ इंश्योरेंस के भरोसे, अगर आप किसी खास विषय पर कुछ जानना चाहते हैंं तो बताएं, हम करेंगे आपकी मदद)
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय आपको कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए:
- पॉलिसी खरीदने की सही उम्र
- उपयुक्त चिकित्सकीय परीक्षण, जो ग्राहकों को पॉलिसी खरीदने से पहले कराने होते हैं
- पॉलिसी सेअधिकतम लाभ प्राप्त करने के तरीके
- उपयुक्त राइडर्स या एड-ऑन, जो पॉलिसी के साथ ही लिए जाते हैं
- बीमारियां, जिन्हें पॉलिसी कवर करती है
- पहले से मौजूद बीमारियों की प्रतीक्षा अवधि
- पुरानी बीमारियों का पारिवारिक इतिहास, जब ग्राहक को स्मार्ट हेल्थ क्रिटिकल इलनेेस कवर खरीदने का सुझाव दिया गया हो। नीचे जारी...
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने के मामले में सबसे उपयुक्त नियम है -जितनी जल्दी, उतना ही बेहतर। अपेक्षाकृत कम उम्र में ही खुद को और अपने परिवार को बीमित कराने से पॉलिसी धारक को किफायती दामों पर पॉलिसी उपलब्ध हो जाती है। साथ ही पर्याप् बीमा कवर लेकर समय पर प्रीमियम देकर पॉलिसी रिन्यू कराने पर क्लेम लेने में भी काफी सुविधा होती है। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने के लिए ज्यादातर कंपनियों ने न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा तय कर रखी है और बीमा पॉलिसी लेने से पहले इसे जांचना जरूरी है। ज्यदातार कंपनियां, एक निश्चित आयु (प्राय:40 से 45 वर्ष की आयु) होने पर अनिवार्य मेडिकल टेस्ट कराने पर जोर देती हैं और इसलिए इस आयु से पहले ही बीमा सुरक्षा प्राप्त कर लेना ठीक रहता है। यह भी उचित है कि आपका बीमा सलाहकार, आप जो बीमा पॉलिसी लेने के इच्छुक है उसकी मुख्य विशेषताओं और फायदों के बारे में आपको पूरी जानकारी दे, और आपकी जरूरतों के अनुरूप सबसे उपयुक्त पॉलिसी तय करने में आपकी मदद करे। इसके बावजूद विभिन्न बीमा पॉलिसियों के बीच तुलना करना जरूरी है। इसके लिए आप www.insurancepandit.com या www.policybazaar.com का सहारा ले सकते हैं।
एक्सक्लूजंश को समझें
सभी की तरह हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में कुछ एक्सक्लूजंंश होते हैं और यह समझना भी बहुत महत्वपूर्ण है कि पॉलिसी में क्या कवर किया जाएगा और क्या नहीं। पॉलिसी के अंतर्गत एक्सक्लूजंस को समझने से आपके सामने यह स्पष्ट हो जाएगा कि आप किस चीज के लिए क्लेम कर सकते हैं और किसके लिए नहीं। ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां या तो नि:शुल्क या मामूली अतिरिक्त लागतों पर एड-ऑन फायदे उपलब्ध कराती हैं। इन लाभों के बारे में जानकारी लेना ठीक रहता है क्योंकि इनमें कुछ ऐसे खर्च कवर किए जाते हैं जो अन्य रूप में कवर नहीं किए गए होते। कुछ प्रमुख एड-ऑन लाभों में निम्रलिखित शामिल हैं-
- अस्पताल नकदी भत्ता (हॉस्पिटल कैश बेनीफिट)
- घर में उपचार
- बच्चों के साथ सहायक रूप में अभिभावकों का ठहराव व्यय
- एम्बुलेंस शुल्क
- इन-पेशेंट फिजियोथेरेपी शुल्क
- सहायक व्यक्ति के खर्च
- बच्चों का एजुकेशन फंड
सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस ही नहीं, इन पर भी करें विचार
बेहतर होगा कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान होने वाले खर्च को कवर करने वाली मूल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के अलावा, आपको बाजार में उपलब्ध अन्य पॉलिसियों पर भी निगाह डालें जो संपूर्ण मेडिकल कवरेज प्रदान करती हैं। ऐसे ही कुछ प्रोडक्ट हैं-
- क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी
- हॉस्पिटल कैश पॉलिसी
- हाई डिडक्टेबल पॉलिसी
कैसे काम करती है हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के लिए आपको उस कंपनी की सालाना फीस देनी होती है जिसे प्रीमियम कहते हैं। आप जिस रकम का कवरेज चाहते हैं आप उसे चुनें आपको उसके हिसाब से कम या अधिक प्रीमियम देना होगा। अगर आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का सम एश्योर्ड यानी कवरेज 5 लाख रुपये चुनते हैं तो किसी बीमारी या दुर्घटना में घायल होने पर उसके इलाज के लिए बीमा कंपनी आपको 5 लाख रुपये तक की रकम की भरपाई करेगी। इसे एक बार में साल भर में मल्टीपल क्लेम में लिया जा सकता है।
बीमा कंपनी से रकम का क्लेम दो तरह से किया जा सकता है:
भरपाई: पहले आपको बिल भरने होंगे फिर आपको उस रकम का क्लेम करना होगा, बीमा कंपनी के पास और बीमा कंपनी आपको रकम का भुगतान करेगी।
कैशलेस सेटलमेंट: इसमें बीमा कंपनी के पैनल में शामिल अस्पताल पॉलिसीधारक का पूरा उपचार करता है और उसे बीमा कंपनी सीधे भुगतान करती है।
किन खर्चोंं को हेल्थ इंश्योरेंस करता है ?
विभिन्न बीमा कंपनियों के हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर अलग-अलग प्रावधान होते हैं। आम तौर पर निम्नलिखित तरह के प्रावधान होते हैं जो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के समय उसके इन्क्लूजन पर आधारित होते हैंघ्
इन-पेशेंट ट्रीटमेंट: इसमें पॉलिसी सम एश्योर्ड तक की राशि का बीमारी की वजह से हॉस्पिटलाइज कवर होता है।
प्री-हॉस्पिटलाइजेशन: इसमें हॉस्पिटलाइजेशन के तुरंत पहले के 60 दिनों में हुए मेडिकल खर्चों को कवर किया जाता है।
पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन: इसके तहत हॉस्पिटलाइजेशन के तुरंत बाद वाले 60 दिनों में हुए मेडिकल खर्चों को कवर करने का प्रावधान है।
डे-केयर प्रोसीजर्स: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के इस प्रावधान के तहत लगभग 141 सूचीबद्ध डे-केयर के ऐसे खर्चो को कवर किया जाता है जिसमें तकनीकी एडवांसमेंट की वजह से 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती।
डोमिसिलियरी ट्रीटमेंट: इसमें घर पर किसी फिजीशियन की सलाह से लिए लिए गए इलाज के खर्चको कवर करने का प्रावधान है।
इमरजेंसी एंबुलेंस: हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के इस प्रावधान में 2,000 रुपये तक की अधिकतम रक म इमरजेंसी में एंबुलेंस पर खर्च करने में दी जाती है।
आयुर्वेदिक/होम्योपैथिक: वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों के बढ़ते चलन से अब तो कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक के जरिए इलाज का प्रावधान भी है।
कौन सी पॉलिसी खरीदें?
आप हेल्थ इंश्योरेंस अपने खुद या परिवार के लिए फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ले सकते हैं। आम तौर पर ऐसी पॉलिसियां 3 माह की उम्र से लेकर 65 साल वालों के लिए उपलब्ध रहती हैं। हालांकि, परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए अलग से हेल्थ इंश्योरेंस लेना ज्यादा बेहतर रहेगा।
(अपनी पसंद के विषय या प्रोडक्ट के बारे में जानकारी के लिए नि:संकोच बताएं, हम आपकी मदद करेंगे)
शुक्रवार, 12 अगस्त 2016
क्योंं करें बीमा और निवेश की जल्द शुरुआत?
क्योंं करें बीमा और निवेश की जल्द शुरुआत?
मनीश कुमार मिश्रमहात्मा गांधी ने कहा था, "हम वर्तमान में जो करते हैं उस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है"। उनका यह कथन निवेश के मामले में भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आप आज अपनी आमदनी से उचित तरीके से निवेश और बचत करते हैं तो इससे आपको भविष्य में एक बेहतर जिंदगी जीने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे आप उन अतिरिक्त लागतों से भी बचेंगे जो इसमें विलंब के कारण आपको झेलना पड़ सकता है।
यह एक वास्तविकता है कि व्यक्ति की बचत एवं उसके निवेश, उसके वित्तीय स्वास्थ्य का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इस वजह से वित्तीय योजनाकार सलाह देते हैं कि जैसे ही लोगों की वित्तीय स्थिति ऐसी हो कि वे बचत/निवेश कर सकते हों, उन्हें तत्काल इसकी शुरुआत कर देनी चाहिए। दुर्भाग्य से, नई शहरी जीवनशैली ने लोगों को बचत व निवेश करने की बजाए खर्च करने की ओर ज्यादा प्रेरित किया है। इंडिया इंक के समृद्ध होने और युवा पेशेवरों को भारी-भरकम पैकेज मिलने के साथ-साथ, लोग पहले से कहीं छोटी आयु में ही वित्तीय रूप से स्वतंंत्र बन गए हैं। वे अपने करियर की बिल्कुल शुरुआत से ही शहरी जीवनशैली कायम रखने के लिए खर्चे भी अधिक कर रहे हैं। नतीजतन, लंबी अवधि में उनमें से अधिकतर अपनी आमदनी को लेकर संतुष्ट हो जाते हैं।
हालांकि, वे अपनी वित्तीय जरूरतों और आकांक्षाओं के बारे में तो जानते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो नियमित रूप से अपने वित्तीय स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण दीर्घकालिक लक्ष्यों जैसे सेवानिवृत्ति और बच्चे की शिक्षा के लिए बचत की अपनी क्षमता की जांच करते हैं। वे यह नहीं समझ पाते हैं कि एक उचित वित्तीय योजना को सूत्रबद्ध करने और उसे क्रियान्वित करने में जो विलंब वे कर रहे हैं, भावी वित्तीय लक्ष्यों पर उसका गंभीर प्रभाव हो सकता है। योजना बनाने में की गई टालमटोल का परिणाम जीवन के बाद के चरणों में वित्तीय बोझ के रूप में देखने को मिल सकता है और हो सकता है कि तब आप भावी वित्तीय लक्ष्यों के लिए बचत को अधिकतम कर पाने में असमर्थ रहें।
शिक्षा के खर्च पर महंगाई का असर
आइए एक उदाहरण की सहायता से हम उस लागत को समझते हैं जो इस विलंब की वजह से हमें झेलनी पड़ सकती है। वर्तमान महंगाई दरों को ध्यान में रखते हुए, एक आकलन से हमें यह पता चलता है कि जिस एमबीए का खर्चा आज 4,00,000 रुपये है, 15 वर्षों में उसका खर्चा 20,00,000 रुपये पर पहुंच जाएगा। कितने माता-पिता ऐसे होंगे जो जरूरत पड़ने पर अपने बच्चे के लिए इस खर्चे को सेवानिवृत्ति कोष में से धन लिए बिना वहन कर पाने के लिए वित्तीय रूप से तैयार होंगे?
चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी की भूमिका
पारंंपरिक विधियों, जैसे कि बैंक के बचत खाते के अलावा माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य सुरक्षित करने के लिए म्यूचुअल फंड भी चुन सकते हैं। दूसरी तरफ, चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी में निवेश यह सुनिश्चित करता है कि माता-पिता के न होने की स्थिति में भी बच्चे की शिक्षा में कोई बाधा न आए। यह न केवल शिक्षा की बढ़ती हुई लागत को ध्यान में रखते हुए एक कोष का सृजन करता है बल्कि माता-पिता को जीवन बीमा भी प्रदान करता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पेंशन प्लान
भारत में औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अभाव के कारण 45 प्रतिशत लोगों के लिए सेवानिवृत्ति, चिंता का एक दूसरा महत्वपूर्ण विषय है। लोग सेवानिवृत्ति के बाद अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए प्रोविडेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ज्यादा निर्भर करते हैं। लेकिन महंगाई की वर्तमान दर, अचल संपत्तियों की कीमतों में हो रहे उछाल और भारत में जीवन-यापन की लागत में हो रही वृद्धि को देखते हुए, मात्र ये बचत पर्याप्त नहीं होगी। सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय प्रवाह के अभाव में आरामदेह जीवनशैली के लिए आपको अभी से योजना बनाने की जरूरत है।
रिटायरमेंट के विभिन्न विकल्प
आज सेवानिवृत्ति कोष बनाने के लिए लोगों के पास कई विकल्प मौजूद हैं जैसे म्यूचुअल फंडों की पेंशन एवं रिटायरमेंट योजनाएं। पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट के साथ मिलकर ये प्लान सेवानिवृत्ति लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को एक संतुलित फाइनेंशियल पोर्टफोलियो उपलब्ध करा सकते हैं।
अब आगे बिना कोई देरी किए अपनी भावी वित्तीय जरूरतों के लिए योजना बनाना शुरु कर दें ताकि आप खुद के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें। याद रखें, भविष्य के लिए सफल प्लानिंग की कुंजी है जल्द शुरुआत करना, वहीं अगर सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते।
शनिवार, 21 नवंबर 2009
जल्द ही हम शीर्ष 10 कंपनियों में शामिल हो जाएंगे
| जल्द ही हम शीर्ष 10 कंपनियों में शामिल हो जाएंगे |
| सवाल-जवाब : चंद्रेश निगम, इक्विटी प्रमुख, ऐक्सिस म्युचुअल फंड |
| मनीश कुमार मिश्र / November 20, 2009 |
ऐक्सिस परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी ने कुछ महीने पहले ही अपना परिचालन शुरू किया है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) और ज्यूरिख एएमसी में वरिष्ठ फंड प्रबंधक के तौर पर काम कर चुके और इक्विटी प्रबंधन में 17 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले चंद्रेश निगम ऐक्सिस म्युचुअल फंड के इक्विटी प्रमुख हैं।
हाल ही में लॉन्च हुए ऐक्सिस इक्विटी फंड और कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर निगम नेमनीश कुमार मिश्र से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश:
पहले से ही एएमसी के क्षेत्र में काफी भीड़-भाड़ है। आप इस क्षेत्र में खुद को किस प्रकार स्थापित करेंगे?
हमारी शुरूआत काफी प्रोत्साहक है। हां, हम इस क्षेत्र के 36वें खिलाड़ी हैं लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि बहुत कम समय में ही निवेशकों के बीच अपना अहम स्थान बनाने में कामयाब होंगे। इसमें ऐक्सिस ब्रांड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
बहुत कम समय में ही हम शीर्ष 10 परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों की श्रेणी में होंगे। अक्टूबर में लॉन्च किए गए दो ऋण फंड -ऐक्सिस ट्रेजरी एडवांटेज फंड और ऐक्सिस लिक्विड फंड पर काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
इस प्रतिस्पर्ध्दी बाजार में खुद को आगे बढ़ाने की आपकी क्या नीति होगी?
बाजार में खुद को स्थापित करने और आगे बढ़ने के लिए तीन चीजें जरूरी होती हैं- ब्रांड, वितरण प्रणाली और फंडों का प्रदर्शन। ब्रांड तो ऐक्सिस बैंक का है ही और ऐक्सिस बैंक की पहुंच भी काफी अच्छी है जिससे हमें वितरण में अच्छी मदद मिलेगी। ऐक्सिस ब्रांड की वजह से स्वतंत्र वितरकों की तरफ से भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। इसके अलावा हमारा ध्यान ग्राहकों को शिक्षित करने पर होगा।
प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद आपने अपनी शुरुआत की है। वितरकों की तरफ से कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?
देखिए, एक बात तो तय है कि प्रवेश प्रभार बंद होने के बाद या कई नियमों में परिवर्तन किए जाने के बावजूद एक बात तो स्पष्ट है कि म्युचुअल फंड उद्योग बंद नहीं होने वाला है। वितरक भी इस बात को समझ रहे हैं और उन्होंने अपने कारोबारी मॉडल में बदलाव किया है।
अब वे कारोबार के परिमाण बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। और जैसा कि मैंने कहा, ऐक्सिस ब्रांड की वजह से उनके तरफ से भी प्रतिक्रिया काफी प्रोत्साहक है।
आप टैक्स सेवर फंड भी लॉन्च करने वाले थे?
दो ऋण फंडों के बाद अभी हमने इक्विटी फंड लॉन्च किया है। उम्मीद है कि दिसंबर के अंत तक टैक्स एडवांटेज फंड भी लॉन्च कर दिया जाएगा।
ऐसा कहा जा रहा है कि छोटी प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति वाले म्युचुअल फंडों का एकीकरण होगा। क्या आप इस तरह के अधिग्रहण पर विचार करेंगे?
हम कारोबार में है तो जाहिर है सारे विकल्प खुले हुए हैं। आपको मालूम होगा कि पहले भी कई म्युचुअल फंड कंपनियों का दूसरे में विलय हो चुका है। किसी भी कारोबार में यह सिलसिला तो चलता ही रहता है।
ऐक्सिस म्युचुअल फंड और किस तरह की योजनाएं लॉन्च करने वाला है?
हम दो प्रकार के फंड लॉन्च करेंगे। एक तो सामान्य जैसे इक्विटी फंड या टैक्स एडवांटेज फंड है। कुछ योजनाएं हमारी अनूठी होंगी जो ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएंगी। अगले 12 से 18 महीनों में हमारे पोर्टफोलियो में आपको सभी तरह की योजनाएं मिल जाएंगी।
आपका इक्विटी फंड अन्य विशाखित इक्विटी फंडों से किस प्रकार भिन्न है?
हमारा यह फंड प्रत्यक्ष रूप से प्रबंधित होगा और इसमें जोखिम-प्रतिफल अनुपात का हमेशा ध्यान रहेगा। हम वैसे शेयरों को पोर्टफोलियो में शामिल करेंगे जो बॉटम आउट हो चुके हैं और 12 से 18 महीनों में बेहतर प्रतिफल दे सकते हैं। हम 30-35 शेयरों का चयन करेंगे और समय-समय पर प्रदर्शन के हिसाब से इसमें बदलाव करेंगे और सबसे बेहतर शेयरों को इसमें शामिल करेंगे।
जोखिम नियंत्रण पर हमारा ध्यान अधिक होगा। हमारी नीति शेयरों में निवेश करने की नहीं कंपनियों में निवेश करने की है। हमारी कोशिश होगी कि ऐक्सिस इक्विटी फंड का प्रदर्शन सबसे बेहतर हो। हमारा अनुमान है कि पहले से वर्तमान कई वर्तमान इक्विटी फंडों की तुलना में हम ऐक्सिस इक्विटी फंड के एनफओ से अधिक राशि जुटा पाएंगे।
शुक्रवार, 4 जुलाई 2008
कम प्रीमियम के बावजूद लोकप्रिय नहीं है सावधि बीमा
'जमाना तो सर यूलिप का है। इसमें बीमा के साथ-साथ निवेश का विकल्प भी है।
निवेश भी आप जितना बताएंगे उस हिसाब से शेयरों में किया जाएगा। बाजार अगले वर्ष 28,000 के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है। समझ लीजिए आपको 30-40 का प्रतिफल तो एक साल में मिल ही जाएगा। लेकिन सावधि बीमा पॉलिसी के मामले में परिपक्वता पर आपको कोई पैसे नहीं मिलेंगे।'
ये शब्द उस बीमा अभिकर्ता के थे जिसे सावधि बीमा की खरीदारी के लिए किसी व्यक्ति ने बुलाया था। सावधि बीमा एक विशुध्द बीमा उत्पाद है। जितने वर्षों तक के लिए आप बीमा लेते हैं उतने ही समय तक आपको प्रीमियम भी देना होता है। अवधि की समाप्ति पर आपको एन्डाउमेंट या यूलिप पॉलिसियों की तरह कोई परिपक्वता राशि नहीं मिलती है। जीवन बीमा का यह उत्पाद आपको केवल सुरक्षा उपलब्ध कराता है और सबसे सस्ता भी है। जीवन बीमा के इस महत्वपूर्ण उत्पाद की बिक्री सबसे कम होती है।
ऑप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल अग्रवाल कहते हैं, 'बीमा कंपनियों को सावधि बीमा योजनाओं को बेचने से कोई खास लाभ नहीं होता है। ज्यादा फायदा उन्हें यूलिप के फंड प्रबंधन से होता है और यही वजह है कि वे सावधि बीमा की बिक्री को ज्यादा प्रोत्साहित नहीं करते हैं।'
वैल्यू रिसर्च के मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीरेन्द्र कुमार कहते हैं, 'सावधि बीमा जीवन बीमा का वास्तविक उत्पाद है। अगर अभिकर्ता यह कहते हैं कि दीर्घावधि में यह निवेश के अन्य विकल्पों की तुलना में अधिक रिटर्न देते हें तो वे गुमराह करते हैं।
वास्तव में यूलिप योजनाओं पर उन्हें प्रीमियम का 30-40 प्रतिशत तक कमीशन के तौर पर मिलता है जबकि सावधि बीमा के मामले में यह केवल 10 से 12.5 प्रतिशत होता है और सावधि बीमा(टर्र्म इंश्योरेंस) के प्रीमियम भी काफी कम होते हैं। जाहिर है कि वे यूलिप या एन्डाउमेंट पॉलिसियां बेचना ज्यादा पसंद करते हैं।'
भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक प्रकाश चंद के विचार अलग हैं। वे कहते हैं, 'कोई भी व्यक्ति जब कहीं पैसे लगाता है तो उससे लाभ प्राप्त करना चाहता है। अगर हम ग्राहकों को टर्म इंश्योरंस पॉलिसी के फायदे भी बताते हंम तो अंत में उनका प्रश्न यही होता है -पॉलिसी की समाप्ति पर मुझे क्या मिलेगा? टर्म इंश्योंरेंस पॉलिसी के कम बिकने की वजह लोगों की ऐसी ही धारणाएं हैं।'
प्रश्न यह उठता है कि आप बीमा निवेश के उद्देश्य से ले रहे हैं या बीमा के उद्देश्य से। अगर परिवार और अर्थिक रुप से निर्भर व्यक्तियों को वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने के खयाल से बीमा की खरीदारी करना चाहते हैं तो सावधि बीमा सबसे सस्ता और बढ़िया बीमा उत्पाद है।
राहुल अग्रवाल कहते हैं, 'हम वैसे लोगों को भी टर्म इंश्योरेंस लेने की सलाह देते हैं जिनके पास यूलिप है लेकिन पर्याप्त कवर नहीं है। यूलिप में उच्च कवर के लिए प्रीमियम भी अधिक देना होता है जबकि टर्म इंश्योरेंस लेकर कोई व्यक्ति यही लाभ सस्ते में पा सकता है।'
धीरेन्द्र कुमार कहते हैं, 'आप यूलिप के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम को दो भागों में बांट दें। उसके एक छोटे हिस्से का भुगतान टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम के रुप में कीजिए और दूसरे हिस्से को अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार किसी अच्छे म्युचुअल फंड में निवेशित करें।
दीर्घावधि में यह यूलिप योजनाओं की तुलना में कई गुना फायदा दे सकता है।' राहुल अग्रवाल ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति 10-15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए यूलिप में निवेश कर रहा है तो अच्छा है। लेकिन इससे कम अवधि के लिए निवेश के अन्य उत्पाद ज्यादा उपयुक्त हैं।'
विभिन्न विशेषज्ञ भी यही सलाह देते हैं कि बीमा और निवेश को अलग कर देखा जाना चाहिए और इनके लिए एक ही योजना को अपनाना बुध्दिमानी नहीं होती। जानकारों का मानना है कि टर्म इंश्योरेंस बीमा का सबसे उम्दा उत्पाद है।
courtesy: bshindi.com

